05 May 1998

कहाँ तुम चले गये...


आँखों में मेरी अब भी,
आँसू वो तुम्हारे हैं...
कैसे भूलूँ वो लम्हे,
तुम संग जो गुज़ारे हैं...
इक पल का था तेरा साथ,
जीवन है अंधेरी रात,
कहाँ तुम चले गये...

तेरी पायल की रुन झुन,
तेरी चूड़ी की छन छन...
है कानों में अब भी,
तेरी हँसी की वो ख़न्न् ख़न्न्...
सूने हैं मेरे सब गीत,
यूँ छीन के ही संगीत,
कहाँ तुम चले गये...

01 November 1997

इक तारा...!!!

दूर गगन में इक तारा है
सब तारों से न्यारा है
घंटों बैठ बचपन से जिसे, मैंने खूब निहारा है
दूर गगन में इक तारा है...
मेरी जीत मेरी हार,मेरी नफ़रत मेरा प्यार
हर राज़ का है वो राज़दार
मेरे सुख दुख का वोही तो इक सहारा है
दूर गगन में इक तारा है...
तुम्हारी यादों का सफ़र भी मैंने 
उसी के संग गुज़ारा है
तुम्हारे बाद, मेरी तन्हाइयों का वही इक सहारा है
जब भी तुम्हारी याद आई
उसी को मैंने पुकारा है
दूर गगन में इक तारा है...
गर मिलो मुझे फिर कभी
तो मिलना उस तारे से भी
पूछना उससे की तुम बिन
कैसे समय गुज़ारा है
दूर गगन में इक तारा है...
वो बातें जो कह ना सका तुमको
कह डालीं उसको
ना समझ पाया कि वोह तुम नहीं, इक तारा है
देखूं जब भी उसे यूँ लगे
कि जैसे चेहरा तुम्हारा है
दूर गगन में इक तारा है...

01 October 1997

तन्हाइयों का सफ़र

कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जैसे बरसात के दिनों में बच्चों का रुके पानी में काग़ज़ की नावें तेराना. ये नावें तैरती तो हैं पर बहुत दूर तक और बहुत देर तक नहीं.
शायद हमारा रिश्ता भी ऐसी ही एक किश्ती जैसा था...